पुरस्कार


 


सरकारी विद्यालय से सेवानिवृति के बाद आज पहली रात थीमृदुला जी को नींद नहीं आ रही थीकई बच्चे उनकी नजरों के सामने से गुजर रहे थेइस विद्यालय में वे गाँव के स्कूल से तबादला लेकर आई थींउनका ख्याल था कि शहर के सरकारी स्कूलों की व्यवस्था अवश्य ही अच्छी होगीकरीब पन्द्रह वर्ष पहले का वह दिन उन्हें याद आ रहा था जब वह यहाँ ज्वाइन करने आई थींज्वाइन करने के बाद कोई क्लास उस दिन नहीं दिया गया थाप्राचार्या ने कहा था कि रूटीन में उन्हें सेट किया जाएगा तब क्लास दिया जाएगावे यूँ ही बैठी स्कूल की गतिविधियाँ देख रही थींउन्होंने गौर किया कि वहाँ पर आठवीं कक्षा के एक बच्चे का नाम सबकी जबान पर था|

रोहितजरा ये फोटो कॉपी करवाकर ले आओ तो,’’ प्राचार्या की आवाज थी|”

जी मैम’’ रोहित की आवाज थी|”

उस वक्त क्लास में पढ़ाई चल रही थी फिर भी रोहित ने प्राचार्या का काम किया|

अभी वह आकर क्लास में बैठा ही था कि पुनः आवाज आई,’’रोहित बेटाहैण्ड पम्प में हैंड जोड़ दोरसोइया आ चुकी है मध्यान्ह भोजन बनाने के लिए|''

जी मैम’, वह आज्ञाकारी बालक पम्प ठीक करने चला गया|

मृदुला जी ने आश्चर्य से पूछा,"हैंड लगाकर क्यों नहीं रखते?’

 चोरी हो जाती है इसलिए काम हो जाने के बाद हटा देते हैं,’’ एक शिक्षिका ने तत्काल जवाब दिया|

‘’रोहितटिफिन टाइम में ये फाइल मेन ओफिस में दे आना,’’ फिर से रोहित की पुकार हुई|

‘’जी मैमदे आऊँगा’’, और लंच टाइम में वह साइकिल से जाकर फाइल दे आया|

लंच के बाद फिर से क्लास लगीसभी शिक्षक अपनी अपनी कक्षा में चले गएफिर से आवाज आई|

‘’रोहितचापा नल से हैंड खोलकर रख दो|’’

‘’जी मैम’’, और वह हैंड खोलने चला गया|

अब छुट्टी होने में पन्दह मिनट बाकी थे |

‘’रोहितघंटी लगा दो प्रार्थना के लिए|

‘’जी मैम’’,

घंटी लगी प्रार्थना हुईरोहित गेट के पास खड़ा हो गयाउसने पहले छात्राओं को बाहर किया फिर लड़के गएवह वापस आया|

‘’रोहित ,अब तुम भी घर जाओ’’, मृदुला जी ने सोचते हुए कहा कि अब कौन सा काम बाकी रह गया|

‘’अभी सारी कुर्सियाँ अन्दर करनी हैं और ताला लगा कर चाबी हेड मैम को देना है’,’कहकर वह काम में जुट गया|

उस दिन मृदुला जी का मन नहीं लगा था घर मेंवे सोचती रहीं,’’हम बच्चों से कभी कभार काम करवाएँ तो ठीक है पर बार बार काम कहने से समय की बहुत बर्बादी होती हैमैं अपने बेटे से तो काम नहीं करवाती ताकि उसे पढ़ने का पूरा समय मिल सकेसरकारी विद्यालय में यह कैसा प्रचलन हैं|’’

दूसरे दिन स्कूल गईं तो उनके लिए भी क्लास दिया गया थासाथ ही उन्हें आठवीं का वर्ग शिक्षक भी बना दिया गया था|

पहली घंटी में उपस्थिति लेने के बाद मृदुला जी ने गणित विषय पढ़ाना शुरु कियाबच्चों की गुणवत्ता जाँचने के लिए पहला सवाल दिया उन्होंनेजिसे सबसे पहले रोहित ने ही कर के दिखायाउसके बाद दूसरा सवाल दिया रोहित ने शुरू ही किया था कि आवाज आई|

 ‘'रोहितएक पेज की फोटो कॉपी चाहिएजरा करवाकर ले आओ बेटा|’’

जी मैम’’ कहकर वह मृदुला जी से फूछकर बाहर गयापाँच मिनट के बाद आने पर फिर से वह सवाल हल करने लगाजब कुछ देर हुई तो मृदुला जी ने पूछा,’’क्या हुआ रोहित,नहीं बन रहाक्या ?’’

‘’मैममुझे आता तो है किन्तु अभी नहीं बन रहा’’|

मृदुला जी समझ गईं कि ध्यान भंग होने की वजह से ऐसा हुआउन्होंने बोर्ड पर उस सवाल को बताया|

‘’रोहितबेटा हैंड पंप ठीक कर दो’’, हेड मैम की आवाज आई |

रोहित ज्योंहि खड़ा हुआमृदुला जी ने उसे रोक दियावे बाहर गईं और नम्रतापूर्वक प्राचार्या से बोलीं, ‘’मैं अपने क्लास से बच्चे को बाहर नहीं निकलने देती|’’

रोहित को भी उन्होंने समझाया, ‘’बेटेअभी तुम्हारा ध्यान सिर्फ पढ़ाई पर होना चाहिएअभी से मेहनत करोगे तो दसवीं बोर्ड अच्छे से पास कर सकोगेकाम करने के लिए जीवन पड़ा है किन्तु पढ़ाई तो अभी ही करनी है|’’

‘’फिर कौन लगाएगा ?’’रोहित ने जिज्ञासा प्रकट किया|

‘’वहीजो खाना बनाएगा’’ कहकर मृदुला जी ने एक रसोइया को बुलाया और कहा कि वह हैंड लेकर चलेवह मदद कर देंगीहेड की नाराजगी झेलने के लिए तैयार होकर मृदुला जी ने कहारसोइया ने स्वयं ही हैंड जोड़ लिया और खाना बनाने लगी|

लंच के बाद हेड ने बुलाया और कहने लगीं,’’ मृदुला जीबच्चों से काम नहीं करवाना चाहिएआपकी इस भावना की मैं कद्र करती हूँकिन्तु तनिक ये भी सोचिए कि मध्य और प्राथमिक विद्यालयों में किसी चपरासी की नियुक्ति नहीं की जातीहर प्रकार के काम का बोझ भी इन विद्यालयों के शिक्षकों पर ही रहता हैसरकार जब चाहेकिसी को भी जनगणनापशु गणनाबाल गणनामतदाता गणना,या बोर्ड के समय इंविजिलेशन ड्यूटी के लिए लगा देती हैऐसे में टीचर्स की कमी भी हो जाती है हम बच्चों से काम न करवाएँ तो क्या करें|’’

‘’मैं आपकी हर बात से सहमत हूँफिर भी यही कहूँगी कि क्लास के बीच से बच्चों को न निकाला जाएहम थोड़ी कोशिश करें तो ऐसा अवश्य होगाकुछ करवाना ही है तो लंच ब्रेक में भी करवा सकते हैं’’, मृदुला जी ने दिल की बात कह दी|

              दूसरे दिन नोटिस बोर्ड पर लगा था,’’आज से स्कूल का कोई कार्य बच्चों से नहीं करवाया जाएगा|’’

हेड मैम के इस सहयोग के लिए मृदुला जी ने आभार प्रकट कियादो महीने बाद आठवीं के बच्चे उस विद्यालय से चले गए|

समय अपनी गति से चलता रहामृदुला जी कभी अपना क्लास मिस नहीं करती थींउनसे प्रेरणा लेकर अन्य शिक्षिकाएँजो गपशप में मशगूल रहा करती थींने भी नियमित रूप से क्लास लेना शुरु कर दियाजिला स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए भी उन्होंने बच्चों को प्रेरित कियाधीरे धीरे उस विद्यालय का नाम अच्छे विद्यालयों में गिना जाने लगामृदुला जी की इज्जत विद्यार्थियों की नजर में सबसे ज्यादा थीजब भी सर्वे होता तो बच्चे अपने पसंद की टीचर में मृदुला जी का ही नाम लेते|

सोच की आवाजाही जारी थीमृदुला जी को याद आया कि आठवीं के जाने के करीब दो साल बाद राज्य सरकार की ओर से सभी शिक्षकों को आमंत्रित किया गयाजिन बच्चों ने दसवीं बोर्ड में राज्य और जिला स्तर पर प्रथमद्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया थाउस दिन उन बच्चों को पुरस्कृत किया जाना थामृदुला जी एवं प्राचार्या समेत सभी टीचर्स उस समारोह में भाग लेने गए|

कार्यक्रम आरम्भ हुआमुख्य अतिथि ने पुरस्कार देना शुरु कियातालियों की गड़गड़ाहट के बीच प्रथम रैंक के बच्चे ने पुरस्कार ग्रहण किया| ‘’रोहित कुमार’’, अचानक यह नाम पुकारा गया तो मृदुला जी चौंक गईं|

राज्य स्तर पर द्वितीय स्थान के लिए इस नाम की घोषणा हुई थीस्टेज पर वह आयादूर से ही मृदुला जी ने उसे पहचान लियाअब भी वह वैसे ही पतला दुबला थासिर्फ लम्बाई बढ़ गई थी उसकीपुरस्कार ग्रहण करने के बाद उसने इच्छा जाहिर की कि वह कुछ कहना चाहता हैआयोजक ने उसे माइक दियामाइक लेकर उसने बोलना शुरू किया|

‘ मैंरोहित कुमारइस पुरस्कार के लिए सरकार का आभार प्रकट करता हूँआज का यह अवार्ड मैं अपने मध्य विद्यालय की शिक्षिका मृदुला मैम को समर्पित करना चाहता हूँउनकी प्रेरणा से ही मैंने सिर्फ पढ़ाई पर अपना ध्यान केन्द्रित किया थायदि यहाँ मृदुला मैम उपस्थित हैं तो मैं नम्रतापूर्वक निवेदन करता हूँ कि वे यहाँ पर आएँ|’

पूरा हॉल तालियों के शोर से भर उठामृदुला मैम की आँखों से अविरल धार बहने लगीप्राचार्या के साथ वे स्टेज पर गईंरोहित ने पैर छूकर उन्हें प्रणाम किया और अपना कप उनकी ओर बढ़ाया|

 फ्लैश लाइट चमकने लगे और मृदुला जी एक कर्मठ और प्रेरणादायी शिक्षिका के रूप में कैमरे में कैद हो गईं|

 मौलिक, स्वरचित

ऋता शेखर ‘मधु’(रीता प्रसाद)

बंगलुरू

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