गुरु-ब्रह्म,गुरु-विष्णु
गुरु गोविंद दोऊं खड़े,काके लागूं पांय
बलिहारी गुरु आपने,गोविंद दियो बताय।
वास्तव में गुरु ही वह सच्चा मार्गदर्शक है जो हमें जीवन का सही पथ दिखाता है।किस मार्ग और किस विचारधारा को ग्रहण करना है,इसका उचित मूल्यांकन करवाना एक गुरु का प्रथम कर्तव्य है। इस संसार में विपुल नैसर्गिक धनराशि बिखरी हुई है।उचित अवसर और समय की जो पहचान करता है,मंज़िल तक वही पहुँच पाता है।यह ब्रह्मांड परावर्तन का पिंड है।हर पल समय का परावर्तन होता रहता है।उस परावर्तन को समझ कर उसके अनुरूप जो व्यक्ति कार्य सिद्ध कर लेता है,वही उसकी दक्षता और निपूर्णता का परिचायक होता है।जीवन में अनेक रास्ते और बिंदु होते हैं।उनका सही चयन करने के लिए मार्गदर्शन की ज़रूरत पड़ती है।गुरु के रूप में प्राप्त उस प्रकाश से प्रकाशित होकर ही हम सफलता के सूरज को छू सकते हैं।
भारतीय इतिहास गुरुओं की महिमा से समृद्ध रहा है। प्राचीन काल के कौटिल्य(चाणक्य)की नीतियाँ आज भी हमें मार्गदर्शन देती है।गौतम बुद्ध और महावीर जैसे ‘केवलज्ञान’से समृद्ध गुरुओं ने,जिन्हें भूत,वर्तमान और भविष्य तीनों काल का सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त हो चुका था,जीव जगत को आज भी रोशनी दिखाकर दुर्लभ जीवन को पाने की राह दिखाई है।जैन ग्रंथ ‘आगम’ आज भी विद्यमान है जो महावीर के ‘केवलज्ञान’ प्राप्ति के बाद के प्रवचनों से ओतप्रोत है।
नवीन भारत स्वामी विवेकानंद,रविंद्र नाथ ठाकुर,सावित्रीबाई फूले,बेगम ज़फ़र अली,स्वामी दयानंद सरस्वती,डा सर्वपल्ली राधाकृष्णन,मदन मोहन मालवीय,महादेवी वर्मा,डा ऐ पी जे अब्दुल कलाम जैसे विदुषी और विद्वानों के महान विचारों और सोच ने हम भारतीयों को आगे बढ़ने और जीवन के प्रति चिंतन को एक नई राह दिखाई जो एक सैद्धांतिक जीवन शैली का परिचय है।
डा॰ सर्वपल्ली राधाकृष्ण भारत के द्वितीय राष्ट्रपति थे।उनमें शिक्षा तथा विद्यार्थीयों में शिक्षा के प्रति जागरूकता जगाने की जो सजगता थी,कि उन जैसे ज्ञान के धनी व्यक्तित्व और शिक्षा का बीज अंकुरित करने वाले व्यक्ति के ‘जन्मदिवस’को ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में घोषित कर दिया गया।यह घोषणा इस बात को दर्शाती है कि हमारा देश उन महान व्यक्तियों का सही मूल्यांकन करता है जो अपने जीवन से सहस्रों जीवन को ज्ञान की ज्योति से उज्जवलित कर देते हैं।सचमुच गुरु ही ब्रह्म है,गुरु ही विष्णु है।सृष्टि की आदि का ज्ञान एक गुरु ही सामने रख सकता है।अगर ज्ञान और चैतन्य ही नहीं होगा तो मनुष्य के लिए ब्रह्मण्डिय अनंत शक्तियाँ नगण्य है।
गुरु को समर्पित कुछ पंक्तियाँ.......
अबोध मैं थी,गहन तम था
अज्ञान से भरा जीवन कठिन था
प्रकाश स्तम्भ से निकल रोशनी
सहज मुझ पर छाई
एक-एक अक्षर को बुनकर
शिक्षा का मैं मोल पाई
गुरु -ब्रह्म,गुरु-विष्णु,
गुरु के आशीर्वचन को
जीवन में ह्रदयसात कर पाई।
मीनाक्षी छाजेड़
कोलकाता
टालीगंज

बहुत बढ़िया प्रस्तुति! ✌️👍💐
जवाब देंहटाएंधन्यवाद आदरणीया🙏
जवाब देंहटाएं